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सलहेश : मैथिली सिनेमा मे एकटा नव डेग | Liveankit

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            Ankit Kumar Roy : किछ दिन पाहिले नेपालक राजधानी काठमांडू में नव मैथिलि फ़िल्मक घोषणा केल गेल, जकर टाइटल "सल्हेश : द पीपुल्स हीरो" छैक | मैथिली सिनेमा में एकटा नव डेग उठबैत नव फिल्म "सलहेश" रिलीज भ रहल अछि | एहि सिनेमा के नाम सलहेश अछि जे मैथिली के प्रसिद्ध शब्द अछि | एहि फिल्मक निर्माता रामेश्वर राय आ निर्देशक राजेश झा छथि ।  एहि फिल्मक कथा मैथिली संस्कृतिक महान नायक सलहेशक जीवन कथा पर आधारित अछि । ई एगो  ऐतिहासिक फिल्म अछि जाहिम सलहेश केरऽ शौर्य आरू हुनकऽ धर्म के प्रति समर्पणक चित्रण करलऽ गेलऽ छै । एहि फिल्म म सलहेशक किरदार बॉलीवुडक सुप्रसिद्ध अभिनेता राजकुमार राव केने छथिन्ह. एहि फिल्म म राजकुमार राव अपन अभिनयक माध्यम सं सलहेशक किरदारक जीवंत केने छथिन्ह. अपन सशक्त अभिनय स सलहेशक भावना कए बढ़ा देने छथि । एकरऽ अलावा फिल्म केरऽ अन्य कलाकारऽ सेहो उत्कृष्ट प्रस्तुति देलैथ |

सहरसाक गामसँ सिनेमाक रजतपटलधरि पहुँचलीह मिथिलाक बेटी संचिता यादव

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गामक संचिता यादवसँ फिल्मजगतक संचिता बसुधरिपछिला शुक्र दिन साउथ फिल्म इण्डस्ट्रीजक एकटा बहुप्रतीक्षित तेलुगू सिनेमा “फर्स्ट डे फर्स्ट शो” रिलीज भेल अछि आ से भारत संगहि अमेरिकाधरि धूम मचा रहल अछि। हर्षक खबरि ई जे एहि फिल्मसँ नायिकाक रूपमे डेब्यू कयलनि अछि मैथिल ललना- संचिता बसु। टिकटॉक, मौज, फेसबुक आदिपर देल अपन विडिओसँ सोशल मिडियापर सनसनी बनि उभरल संचिता मिथिलाक सहरसा जिलाक सलखुआ प्रखण्डन्तर्गत सितुआहा पंचायतक महादेव मंठ गामक रहनिहारि छथि । पिता सुरेन्द्र यादव आ माय वीणा यादवक उत्साहवर्द्धन सँ आइ संचिता बसु फिल्म जगतक एकटा मुकामधरि पहुँचबा मे सफल भ’ गेल छथि। २४ मार्च २००३ केँ सुरेन्द्र यादव आ वीणा यादवक बेटीक रूपमे जनमल संचिता नेनपनेसँ प्रतिभाशालिनी रहल छथि आ भागलपुरसँ इण्टरमीडिएट करैत सोशल मिडियापर अपन अदाकारीसँ एकटा विशाल प्रशंसकवर्ग तैयार कयलन्हि अछि। सोशल मिडियाक विभिन्न प्लेटफार्मपर मिलियनो संचिताक फैन-फालोवर छन्हि। सहरसाक रहयवला कास्टिंग निर्देशक नवनीत झाक नजरि संचिताक प्रतिभापर गेलन्हि आ नवनीतक सहयोगसँ संचिताक प्रवेश दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योगमे भेलन्हि आ सम्प्रति कैकटा सिनेमामे ...

Azadi Ka Amrit Mahotsav : 116 साल में छह बार बदला राष्ट्रीय ध्वज, जानें आजादी से पहले के पांच भारतीय झंडों की कहानी ।

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  Azadi Ka Amrit Mahotsav :  15 अगस्त, 2022 को देश की आजादी को 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस अवसर पर बीते एक साल यानी 15 अगस्त, 2021 से ही पूरे हिंदुस्तान में आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के तहत हर घर तिरंगा अभियान चलाया जा रहा है। गांव-गांव, शहर-शहर लोगों से अपने घरों और प्रतिष्ठानों पर तिरंगा फहराने की अपील की गई है। लेकिन इस तिरंगे के पीछे की कहानी बहुत लंबी है। बीते 116 साल में छह बार देश का झंडा बदला गया है। हालांकि, ये बदलाव आजादी मिलने तक ही हुए। इसलिए, आजादी की वर्षगांठ पर देशवासियों के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि हमारे राष्ट्रीय ध्वज की इस यात्रा में क्या-क्या अहम पड़ाव रहे और कब-कब, क्या-क्या बदलाव हुए। भारतीय राष्ट्रीय ध्वज में आखिरी बदलाव 1947 में हुआ था, उस वक्त इसे तिरंगे का नाम भी दिया गया। आइए जानते हैं तिरंगे तक का सफर | 1906 में मिला पहला राष्ट्रीय ध्वज  भारत की आजादी की लड़ाई जैसे-जैसे तेज होती जा रही थी, क्रांतिकारी दल अपने-अपने स्तर पर स्वतंत्र राष्ट्र की अलग प...

कारगिल विजय दिवस / Liveabhinash

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कारगिल विजय दिवस स्वतंत्र भारत के सभी देशवासियों के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण दिवस है। भारत में प्रत्येक वर्ष 26 जुलाई को यह दिवस मनाया जाता है। इस दिन भारत और पाकिस्तान की सेनाओं के बीच वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध हुआ था जो लगभग 60 दिनों तक चला और 26 जुलाई के दिन उसका अंत हुआ और इसमें भारत विजय हुआ। कारगिल विजय दिवस युद्ध में शहीद हुए भारतीय जवानों के सम्मान हेतु यह दिवस मनाया जाता है। इतिहास 1971 के भारत-पाक युद्ध के बाद भी कई दिन सैन्य संघर्ष होता रहा। इतिहास के मुताबित दोनों देशों द्वारा परमाणु परीक्षण के कारण तनाव और बढ़ गया था। स्थिति को शांत करने के लिए दोनों देशों ने फरवरी 1999 में लाहौर में घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए। जिसमें कश्मीर मुद्दे को द्विपक्षीय वार्ता द्वारा शांतिपूर्ण ढंग से हल करने का वादा किया गया था। लेकिन पाकिस्तान ने अपने सैनिकों और अर्ध-सैनिक बलों को छिपाकर नियंत्रण रेखा के पार भेजने लगा और इस घुसपैठ का नाम "ऑपरेशन बद्र" रखा था। इसका मुख्य उद्देश्य कश्मीर और लद्दाख के बीच की कड़ी को तोड़ना और भारतीय सेना को सियाचिन ग्लेशियर से हटाना था। पाकिस्तान यह भी...

ककार घाट पर हुआ जानलेवा दुर्घटना दो की मरने की आशंका। Liveabhinash

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देर रात को नागपंचमी के दिन काकड़ घाट मेला देखने गए दो युवक को मृत्यु बाइक दुर्घटना में हो चुकी है। दुर्घटना होने के बाद आस पास के लोग दुर्घटनाग्रस्त की मदद करने पहुंचे मगर तब तक समय जा चुका था दुर्घटना स्थल पर ही एक व्यक्ति के मृत्यु की आशंका है। कैसे हुआ दुर्घटना? नागपंचमी की रात दो व्यक्ति अपने बाइक पर मेला देख कर काकड़ से जा रहे थे और मेला देखने एक व्यक्ति अपने बाइक से काकड़ आ रहा था, दोनो अपनी बाइक बहुत ही तेजी से चला रहा था। ऐसे के दोनो टकरा कर दुर्घटना ग्रस्त हो गए। एक व्यक्ति जो मेला देखने आया था उसे कुछ नही हुआ सिर्फ कुछ छोटे आए और मौका देखकर वो व्यक्ति भाग भी गया, लेकिन वो दो व्यक्ति जो मेला देख कर जा रहे थे उनको काफी चोट लगी। दुर्घटना स्थल पर ही एक व्यक्ति का मौत हो गया। एक को हॉस्पिटल ले जाया गया मगर रास्ते में उसने दम तोड दी। चारो और सन्नाटा पसरा हुआ है।         Reporter Govind Kumar Roy facebook   |  instagram

क्या हिंदुओं को खतरा है हिंदुस्तान में ? क्या जो भारत देख रहा है हिन्दू राष्ट्र का सपना वो कभी पूरा नहीं हो पायेगा ? / Liveankit

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कहने को तो भारत सभी धर्मो की आस्था को स्वीकार्य करता है । मगर सरकार चलाने वाले लोग ही देश में धर्म के नाम पर संप्रदाइक दंगा फसाद फसते है | देश में कही ना कही मदरसे के नाम पर देशविरोधी ज्ञान मुस्लिम संप्रदाय के नव किशोर में भरा जा रहा है। तब जाकर धर्मो के ठेकेदार उनका फायदा उठा अपनी राजनीति चमकाते है। बीते दिनों में देश में धर्म को लेकर ऐसा हालत बना है कै देश के एक धर्म के लोग दूसरे धर्म के लोगो को देखना नही चाहते है। धर्मांधता इस प्रकार बढ़ी है की एक धर्म के लोग दूसरे धर्म के लोगो का खून करने पर उतावले हो गए है।  मुस्लिम समाज द्वारा बार बार ऐसी गलतियां की जा रही है जिसके कारण उनपर संकट आ सकती है मगर बात ये है कै मुस्लिम समाज गलतियां कर भी सांति से रह लेती है इनका कारण कुछ और नहीं उनकी एकता है | रही बात हिंदुओ की तो जब हिंदुओ की बात आती है तब हिंदू अपने को ही उपजातिओ में विभक्त कर लेते है जैसे ब्राह्मण, क्षत्रिय और अन्य। हिंदुओ की इसी गलती के कारण हिंदू बहुल राष्ट्र होने के बावजूद देश में मुस्लिम समुदाय दंगा फसाद और आतंक मचा रही है। जब तक हिंदू समाज एक नहीं ...

टीवी स्क्रीन पर धूम मचबैत मैथिल ललना सृति झा | Liveankit

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टीवी स्क्रीन पर धूम मचबैत मैथिल ललना सृति झा टीवी धारावाहिक सँ स्नेह राखयवला / वाली लोक लेल ई चेहरा सर्वथा परिचित भ’ गेल छथि । मूलत: बेगुसराई जिलाक डरहार गामक रहनिहारि सृति झाक जन्म 26 फरवरी 1986 केँ भेलनि । हिनक माता पिता आब काठमांडू वासी भ’ गेल छथि । पिता मिथिलेश झा बहुत दिन धरि नेपाल मैथिल समाजक अध्यक्ष रहि चुकल छथि आ फर्स्ट फ्लाइट कोरियर नेपालक निदेशक छथि आ हिनक बहिन मीनाक्षी झा भारतीय अंग्रेजी मिडियाक सुपरिचित नाम । दिल्ली विश्वविद्यालय अन्तर्गत व्यंकटेश्वर कालेजक छात्रा रहबा क्रम मे सृतिक जुड़ाव रंगमंच सँ भेलनि । अनेको नाटक मे अपन अभिनयक छाप छोड़ैत मुम्बई पहुँचलीह आ धारावाहिक रक्तसम्बन्ध मे हिनक मूकबधिर अभिनयक खूब प्रशंसा भेल आ टीवी धारावाहिक सभक द्वारि हिनका लेल खुलि गेलन्हि । सौभाग्यवती भव: धारावाहिक मे मुख्य चरित्र जान्हवी केँ जीवन्त करैत सृति झा छोटका परदाक चर्चित सेलिब्रिटी भ’ गेलीह, तँ कुमकुम भाग्य मे मुख्य भूमिका प्रज्ञा’क अभिनय लेल हिनका सर्वश्रेष्ठ अभिनयक अवार्ड भेटलनि । धूम मचा लो धूम मे सेहो खूब धूम मचौलीह आ आब एकटा व्यस्ततम अभिनेत्री छथि । मातृभाषा मैथिली सँ आत्मीय ...

कलयुग के श्रवण कुमार! बूढ़े माता-पिता को कांवड़ में बिठाकर 105 KM की यात्रा पर निकले बेटा-बहू | Liveankit

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  मुंगेर. कलयुग में आज जहां वृद्ध माता-पिता की सेवा करना बेटा और बहू एक बोझ मानते हैं तो वहीं इसी कलयुग में बिहार का एक पुत्र और पुत्र वधू श्रवण कुमार की भूमिका निभा रहे हैं. सावन मेला में ये दंपति अपने माता-पिता को ठीक उसी तरह तीर्थ (बाबाधाम की यात्रा) पर निकला है जैसे कभी श्रवण कुमार निकले थे. बिहार के जहानाबाद के रहने वाले चंदन कुमार और उनकी पत्नी रानी देवी माता-पिता को देवघर ले जाने के लिए श्रवण कुमार बन गए और अपने माता-पिता को लेकर बाबाधाम की यात्रा पर निकले हैं.  सुल्तानगंज से जल भरकर दोनों ने देवघर के लिए प्रस्थान किया. चंदन कुमार ने बताया कि हम प्रत्येक महीने सत्यनारायण व्रत का पूजन करते हैं और उसी के दौरान मन में इच्छा जाहिर हुई माता और पिताजी को बाबाधाम की पैदल तीर्थ कराने की लेकिन माता और पिताजी वृद्ध हैं तो ऐसे में 105 किलोमीटर की लंबी यात्रा पैदल तय करना संभव नहीं था. चंदन ने बताया कि इसके लिए मैंने अपनी पत्नी रानी देवी को बताया तो उन्होंने भी इसमें अपनी भागीदारी देने की हिम्मत दी.जिसके बाद हम दोनों ने ये कार्य करने की ठान ली और इसके लिए माता-पिता की भी अनुमति ली ...

मिथिला क नाग पंचामि, प्राख्यात छै सम्पूर्ण विश्व में |

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मिथिला मs हर इक दिन त्यौहारऐ कs रूप मनायल जैत छै। मिथिला कs ओहि त्यौहार सब मs स एगो छै नागपंचमी।नागपंचमी सम्पूर्ण मिथिला में बहुत ही धूम धाम सs मनायल जैत छै । ई त्यौहार सावन मासक पहिल सोमवाड़ी क मनाओल जैत छैथ। आही त्योहार मs लोक सुबह उठी पूरा घर का सफाई कs गोबर सs घर निप कs सुंदर बनायल जैत छै। घर मs त्यौहारक माहौल रहई छै।  माटी कs थुम्हा बना सब घर में राखाल जैत छै |  मानल जैत छै जे आही का राखाल स घरक वातावरण बढ़िया बनल रहल जैत छै। आही क।रने सब मैथिल अपना घर में साल भैर ई थुम्हा कs घर में रखैत छैथ |  आही दिन विशहारा भगवान क पूजा केल जैत छै। हिंदू धर्म मे विश्व के सम्पूर्ण चीज़ कs भगवाने मनल जैत छै।  आही पाबैन में लोक निमक पत्ता संग दही लगा कs खैत छैथ। गांव में महिला लोक पोखर में स्नान कs कुश हाथ में बानी लैट छैथ। भोजन का तौर पर आही कs दिन लोक चूड़ा, दही आ चीनी खाईत छैथ। नागपंचमी के अवसर पर कुछ जगह मेलाक आयोजन सेहू केल जायत छैथ | ओहि मेले कs कुछ भाग प्रस्तुत छैथ।  रिपोर्टर  गोविन्द कुमार चौधरी  

सावन मासकs प्रथम सोमवारी में लागल भक्त कs भरमार ।

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  सावन मास कs आगमन होएते सम्पूर्ण हिंदू धर्मक अनुयाई महादेव कs भक्ति में दुएब जैत छैथ। खास कs मिथिलावासी में सावन आबिये ऐक टा अल्गे फुर्ती जैग जैत छैथ। मिथिला कs बहिन जानकिक भूमि कहल जैत छैथ और आही भूमि पर अनेकों ऐतिहासिक जगह अईछ।सम्पूर्ण मिथिला में अनऐको मंदिर छई। अगर ठीक सा ढेखल जाए तs अधिकतर मंदिर महादेबेक छैथ।सावन का महीना तs अायले छैथ मुदा ऊहु में सवानक प्रथम सोमवारी, सम्पूर्ण शिव भक्त में बुझी जे आस्था कs आईग लाईग गेल छैथ। ई आग मिथिला कs सिवालय शांत करैत छैथ। लोकल भीड़ सम्पूर्ण मिथिलाक सिवलय में दिखाई देलक। चाहे ऊ कुशेश्वर स्थान हो चाहे देवकुली, चाहे अक्षरधामक सिवालाय हो। सब मंदिर में अ|स्थाक भीड़ भरपूर देखाई ले मिलल।  भक्तजन शिवालय में जा महादेवक जाप करैत नजर आबैत छैथ। पूरा मंदिर कसमकस स भरक प्रतीत होएत छल| आही कसमकस में भक्तक आस्था पर एक रत्ती आच नै आयल | मुदा अत्यधिक भीड़ क कारन प्रसासन के कमी जरूर नजर आयल | प्रसाशन क कमी कs बावजूद भीड़ समय कs साथ बदल गल | महादेवक धारसँ हेतु आयल भक्त बोल बम के नारा लगबैत बाबा क दरसन खातिर अपन बहुमूल्य समय के बाबा के ...

बिहार का ऐसा स्कूल जहां दफन है 23 बच्चों की लाश! आज 9वीं बरसी पर बच्चों ने…

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आज 16 जुलाई है। आज के दिन बिहार का ऐसा गांव है जहां के लोग मातम में डूबे हुए हैं, क्योंकि आज से ठीक 9 साल पहले आज के दिन एक ऐसी घटना घटी थी, जिसमें 23 बच्चों की जान चली गई। मामले में प्राचार्य की लापरवाही सामने आई थी. उनके खिलाफ केस चला और उन्हें सजा भी हुई, लेकिन इस आपराधिक लापरवाही को याद कर लोग आज भी सिहर उठते हैं। दरअसल मध्याह्न भोजन योजना के निवाले से जान गंवाने वाले नवसृजित विद्यालय के 23 बच्चों की बरसी 16 जुलाई शनिवार को मनाई गई । कहा जाता है की नौ साल पहले 16 जुलाई 2013 को मशरक प्रखंड के धरमासती बाजार के पास गंडामन गांव के सामुदायिक भवन में प्राथमिक विद्यालय चल रहा था. यहां मिड डे मील खाकर 23 मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई थी। इस घटना के बाद लोगों ने आस लगा रखी थी कि उन्हें सरकार की तरफ से कोई मदद मिलेगी, लेकिन सरकार की तरफ से भी उन्हें कोई मदद नहीं मिली। ना ही कोई उनसे मंत्री या फिर सीएम मिलने आया।\ ग्रामीणों ने ही बच्चों की याद में गांव में स्मारक स्थल का निर्माण कराया गया है, जो जर्जर हो गया था। इस बार पंचायत के मुखिया ने अपने कोष से इसकी मरम्मत करा दिया है। गंडामन गांव म...

सैनिक का शव गांव पहुंचते हीं मचा कोहराम |

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  समस्तीपुर,ताजपुर: प्रखण्ड क्षेत्र के आधारपुर गांव में शुक्रवार को जैसे ही सैनिक का शव पहुचा, मचा कोहराम। खबर आग की तरह क्षेत्र में फैल गयी। अपने इलाके के सैनिक का अंतिम दर्शन के लिए क्षेत्र से हजारों लोग जुटने लगे। गांव में पुरे दिन मातम का माहौल छाया रहा। जाट रेजीमेंट के सैनिकों द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर की सैन्य सम्मान के साथ सैनिक की पार्थिक शरीर को पंचतत्व में विलीन कर दिया गया। बताते चलें कि अधारपुर गांव निवासी शिवशंकर राय उर्फ दरोगा राय का पुत्र जितेंद्र कुमार राय(37) जो कि जम्मू कश्मीर में थल सेना (हवलदार) के रूप में तैनात था। फिलहाल तीन-चार माह से वह बीमार चल रहा था। अचानक तबियत ज्यादा बिगड़ने के कारण बेहतर इलाज के लिए दिल्ली सैनिक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान बुद्धवार को उसकी मृत्यु हो गयी । मृत्यु की खबर से परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। परिजनों के साथ-साथ पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गयी । आंसुओं का सैलाब बहने लगा। सभी का रो-रो कर बुरा हाल होने लगा। शुक्रवार को जैसे हीं सैनिक का पार्थिव शरीर घर अधारपुर पहुंचा माता-पिता,पतन्नी, बच्चे सहित पूरे परिजन शव...

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