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जनकपुर- एक पौराणिक नगरी \ Liveankit

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परिचय- संस्कृति और साहित्य का प्रदेश मिथिला जो न जाने कितने रहस्य अपने आप में छुपाते हुये सदियों से बिहार की स्वर्णिम धरती पर विद्यमान है। कहते हैं किसी भी प्रदेश की पहचान उसके गाँवो और शहरों से होती है। और यहाँ बसी होती हैं हज़ारों साल पुरानी कहानियाँ और इन कहानियों में समाई होती हैं कई आम ज़िंदगियाँ जो समय के साथ खास और मुल्यवान हो जाती हैं और जिनकी गाथा युगों – युगों तक कही और सुनाई जाती है। मेरा बचपन भी इन्हीं किस्से कहानियों मेंं बीता है। मैं बहुत गर्व महसूस करती हूँ कि मैंने उस धरती पर जन्म लिया जहाँ माँ सीता कण-कण में हैं, जहाँ श्री राम प्रत्येक व्यक्ति के मन में हैं। मेरे बचपन की राजा – रानी की कहानियों में राजा श्री राम हैं और रानी माता सीता। आज मैं जिस नगर की बात कर रही हूँ वह साक्षी है त्याग, बलिदान, पराकर्म, प्रेम, धर्म, वचन और जीवन की। जनकपुर नेपाल के हिस्से में पड़ने वाले मिथिला का भाग है। यह शहर नेपाल के धनुषा जिले में बसा है। मिथिला नगरी की सीमायें वर्तमान नेपाल के कुछ हिस्से तक फैली है।जनकपुर शहर आज धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन का केंद्र है। प्रत्येक वर्ष यहाँ देश – वि...

कारगिल विजय दिवस / Liveabhinash

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कारगिल विजय दिवस स्वतंत्र भारत के सभी देशवासियों के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण दिवस है। भारत में प्रत्येक वर्ष 26 जुलाई को यह दिवस मनाया जाता है। इस दिन भारत और पाकिस्तान की सेनाओं के बीच वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध हुआ था जो लगभग 60 दिनों तक चला और 26 जुलाई के दिन उसका अंत हुआ और इसमें भारत विजय हुआ। कारगिल विजय दिवस युद्ध में शहीद हुए भारतीय जवानों के सम्मान हेतु यह दिवस मनाया जाता है। इतिहास 1971 के भारत-पाक युद्ध के बाद भी कई दिन सैन्य संघर्ष होता रहा। इतिहास के मुताबित दोनों देशों द्वारा परमाणु परीक्षण के कारण तनाव और बढ़ गया था। स्थिति को शांत करने के लिए दोनों देशों ने फरवरी 1999 में लाहौर में घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए। जिसमें कश्मीर मुद्दे को द्विपक्षीय वार्ता द्वारा शांतिपूर्ण ढंग से हल करने का वादा किया गया था। लेकिन पाकिस्तान ने अपने सैनिकों और अर्ध-सैनिक बलों को छिपाकर नियंत्रण रेखा के पार भेजने लगा और इस घुसपैठ का नाम "ऑपरेशन बद्र" रखा था। इसका मुख्य उद्देश्य कश्मीर और लद्दाख के बीच की कड़ी को तोड़ना और भारतीय सेना को सियाचिन ग्लेशियर से हटाना था। पाकिस्तान यह भी...

ककार घाट पर हुआ जानलेवा दुर्घटना दो की मरने की आशंका। Liveabhinash

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देर रात को नागपंचमी के दिन काकड़ घाट मेला देखने गए दो युवक को मृत्यु बाइक दुर्घटना में हो चुकी है। दुर्घटना होने के बाद आस पास के लोग दुर्घटनाग्रस्त की मदद करने पहुंचे मगर तब तक समय जा चुका था दुर्घटना स्थल पर ही एक व्यक्ति के मृत्यु की आशंका है। कैसे हुआ दुर्घटना? नागपंचमी की रात दो व्यक्ति अपने बाइक पर मेला देख कर काकड़ से जा रहे थे और मेला देखने एक व्यक्ति अपने बाइक से काकड़ आ रहा था, दोनो अपनी बाइक बहुत ही तेजी से चला रहा था। ऐसे के दोनो टकरा कर दुर्घटना ग्रस्त हो गए। एक व्यक्ति जो मेला देखने आया था उसे कुछ नही हुआ सिर्फ कुछ छोटे आए और मौका देखकर वो व्यक्ति भाग भी गया, लेकिन वो दो व्यक्ति जो मेला देख कर जा रहे थे उनको काफी चोट लगी। दुर्घटना स्थल पर ही एक व्यक्ति का मौत हो गया। एक को हॉस्पिटल ले जाया गया मगर रास्ते में उसने दम तोड दी। चारो और सन्नाटा पसरा हुआ है।         Reporter Govind Kumar Roy facebook   |  instagram

क्या हिंदुओं को खतरा है हिंदुस्तान में ? क्या जो भारत देख रहा है हिन्दू राष्ट्र का सपना वो कभी पूरा नहीं हो पायेगा ? / Liveankit

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कहने को तो भारत सभी धर्मो की आस्था को स्वीकार्य करता है । मगर सरकार चलाने वाले लोग ही देश में धर्म के नाम पर संप्रदाइक दंगा फसाद फसते है | देश में कही ना कही मदरसे के नाम पर देशविरोधी ज्ञान मुस्लिम संप्रदाय के नव किशोर में भरा जा रहा है। तब जाकर धर्मो के ठेकेदार उनका फायदा उठा अपनी राजनीति चमकाते है। बीते दिनों में देश में धर्म को लेकर ऐसा हालत बना है कै देश के एक धर्म के लोग दूसरे धर्म के लोगो को देखना नही चाहते है। धर्मांधता इस प्रकार बढ़ी है की एक धर्म के लोग दूसरे धर्म के लोगो का खून करने पर उतावले हो गए है।  मुस्लिम समाज द्वारा बार बार ऐसी गलतियां की जा रही है जिसके कारण उनपर संकट आ सकती है मगर बात ये है कै मुस्लिम समाज गलतियां कर भी सांति से रह लेती है इनका कारण कुछ और नहीं उनकी एकता है | रही बात हिंदुओ की तो जब हिंदुओ की बात आती है तब हिंदू अपने को ही उपजातिओ में विभक्त कर लेते है जैसे ब्राह्मण, क्षत्रिय और अन्य। हिंदुओ की इसी गलती के कारण हिंदू बहुल राष्ट्र होने के बावजूद देश में मुस्लिम समुदाय दंगा फसाद और आतंक मचा रही है। जब तक हिंदू समाज एक नहीं ...

टीवी स्क्रीन पर धूम मचबैत मैथिल ललना सृति झा | Liveankit

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टीवी स्क्रीन पर धूम मचबैत मैथिल ललना सृति झा टीवी धारावाहिक सँ स्नेह राखयवला / वाली लोक लेल ई चेहरा सर्वथा परिचित भ’ गेल छथि । मूलत: बेगुसराई जिलाक डरहार गामक रहनिहारि सृति झाक जन्म 26 फरवरी 1986 केँ भेलनि । हिनक माता पिता आब काठमांडू वासी भ’ गेल छथि । पिता मिथिलेश झा बहुत दिन धरि नेपाल मैथिल समाजक अध्यक्ष रहि चुकल छथि आ फर्स्ट फ्लाइट कोरियर नेपालक निदेशक छथि आ हिनक बहिन मीनाक्षी झा भारतीय अंग्रेजी मिडियाक सुपरिचित नाम । दिल्ली विश्वविद्यालय अन्तर्गत व्यंकटेश्वर कालेजक छात्रा रहबा क्रम मे सृतिक जुड़ाव रंगमंच सँ भेलनि । अनेको नाटक मे अपन अभिनयक छाप छोड़ैत मुम्बई पहुँचलीह आ धारावाहिक रक्तसम्बन्ध मे हिनक मूकबधिर अभिनयक खूब प्रशंसा भेल आ टीवी धारावाहिक सभक द्वारि हिनका लेल खुलि गेलन्हि । सौभाग्यवती भव: धारावाहिक मे मुख्य चरित्र जान्हवी केँ जीवन्त करैत सृति झा छोटका परदाक चर्चित सेलिब्रिटी भ’ गेलीह, तँ कुमकुम भाग्य मे मुख्य भूमिका प्रज्ञा’क अभिनय लेल हिनका सर्वश्रेष्ठ अभिनयक अवार्ड भेटलनि । धूम मचा लो धूम मे सेहो खूब धूम मचौलीह आ आब एकटा व्यस्ततम अभिनेत्री छथि । मातृभाषा मैथिली सँ आत्मीय ...

कलयुग के श्रवण कुमार! बूढ़े माता-पिता को कांवड़ में बिठाकर 105 KM की यात्रा पर निकले बेटा-बहू | Liveankit

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  मुंगेर. कलयुग में आज जहां वृद्ध माता-पिता की सेवा करना बेटा और बहू एक बोझ मानते हैं तो वहीं इसी कलयुग में बिहार का एक पुत्र और पुत्र वधू श्रवण कुमार की भूमिका निभा रहे हैं. सावन मेला में ये दंपति अपने माता-पिता को ठीक उसी तरह तीर्थ (बाबाधाम की यात्रा) पर निकला है जैसे कभी श्रवण कुमार निकले थे. बिहार के जहानाबाद के रहने वाले चंदन कुमार और उनकी पत्नी रानी देवी माता-पिता को देवघर ले जाने के लिए श्रवण कुमार बन गए और अपने माता-पिता को लेकर बाबाधाम की यात्रा पर निकले हैं.  सुल्तानगंज से जल भरकर दोनों ने देवघर के लिए प्रस्थान किया. चंदन कुमार ने बताया कि हम प्रत्येक महीने सत्यनारायण व्रत का पूजन करते हैं और उसी के दौरान मन में इच्छा जाहिर हुई माता और पिताजी को बाबाधाम की पैदल तीर्थ कराने की लेकिन माता और पिताजी वृद्ध हैं तो ऐसे में 105 किलोमीटर की लंबी यात्रा पैदल तय करना संभव नहीं था. चंदन ने बताया कि इसके लिए मैंने अपनी पत्नी रानी देवी को बताया तो उन्होंने भी इसमें अपनी भागीदारी देने की हिम्मत दी.जिसके बाद हम दोनों ने ये कार्य करने की ठान ली और इसके लिए माता-पिता की भी अनुमति ली ...

सावन मासकs प्रथम सोमवारी में लागल भक्त कs भरमार ।

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  सावन मास कs आगमन होएते सम्पूर्ण हिंदू धर्मक अनुयाई महादेव कs भक्ति में दुएब जैत छैथ। खास कs मिथिलावासी में सावन आबिये ऐक टा अल्गे फुर्ती जैग जैत छैथ। मिथिला कs बहिन जानकिक भूमि कहल जैत छैथ और आही भूमि पर अनेकों ऐतिहासिक जगह अईछ।सम्पूर्ण मिथिला में अनऐको मंदिर छई। अगर ठीक सा ढेखल जाए तs अधिकतर मंदिर महादेबेक छैथ।सावन का महीना तs अायले छैथ मुदा ऊहु में सवानक प्रथम सोमवारी, सम्पूर्ण शिव भक्त में बुझी जे आस्था कs आईग लाईग गेल छैथ। ई आग मिथिला कs सिवालय शांत करैत छैथ। लोकल भीड़ सम्पूर्ण मिथिलाक सिवलय में दिखाई देलक। चाहे ऊ कुशेश्वर स्थान हो चाहे देवकुली, चाहे अक्षरधामक सिवालाय हो। सब मंदिर में अ|स्थाक भीड़ भरपूर देखाई ले मिलल।  भक्तजन शिवालय में जा महादेवक जाप करैत नजर आबैत छैथ। पूरा मंदिर कसमकस स भरक प्रतीत होएत छल| आही कसमकस में भक्तक आस्था पर एक रत्ती आच नै आयल | मुदा अत्यधिक भीड़ क कारन प्रसासन के कमी जरूर नजर आयल | प्रसाशन क कमी कs बावजूद भीड़ समय कs साथ बदल गल | महादेवक धारसँ हेतु आयल भक्त बोल बम के नारा लगबैत बाबा क दरसन खातिर अपन बहुमूल्य समय के बाबा के ...

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