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Showing posts from August, 2022

शास्त्रक वचन \ खट्टर कका कs तरंग \ हरिमोहन झा \ Liveabhinash

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ओहि दिन खट्टर कका सॅं शास्त्रचर्चा छिडि गेल । बात ई भेलैक जे खट्टर कका चार छरबैत रहथि । हम कहलिऎन्ह - खट्टर कका, भदबे में छवनी करबैत छिऎक ? खट्टर कका बजलाह – हौ, अनदिना जन नहिं भेटैत अछि । तैं घरहट कऽ काज हम भदबे में करा लैत छी । हम कहलिऎन्ह - खट्टर कका, अहाँ शास्त्र क वचन नहिं मानैत छिऎक ? खट्टर कका बजलाह - कोन-कोन वचन मानय कहैत छह ? हम कहलिऎन्ह - शास्त्र में जे किछु लिखल छैक से हमरा लोकनिक कल्याणार्थे । सभ में किछु ने किछु अभिप्राय भरल छैक । मनु, याज्ञवल्क्य, पराशर आदि की एकोटा वचन निरर्थक लिखने छथि ? खट्टर कका मुस्कुरा उठलाह । बजलाह - तखन हम एकटा पुछैत छिऔह । मनु क वचन छैन्ह - न दिविन्द्रायुधं दृष्ट्वा कस्यचिद्दर्शयेद्बुधः । जौं आकाश में इन्द्रधनुष देखी त दोसरा कैं नहिं देखाबी । एहि मे कोन अभिप्राय छैक ? और उदाहरण लैह ।  स्मृति समुच्चय में लिखैत छैक - स्वगृहे प्राक्शिराः स्वप्यात् , श्वाशुरे दक्षिणाशिराः । प्रत्यक्शिराः प्रबासे च न कदाचिदुदङ्ग मुखः ॥ अर्थात अपना घर में पूब मूहें सूती । सासुर में दक्षिण मूहें सूती । परद...

मर्यादाक भंग \ चर्चरी \ ( हरिमोहन झा ) \ Liveankit

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आइ पण्डितजीक आङनमे हूलिमालि उठल छैन्ह। कारण जे एक पाहुन आबि गेल छथिन्ह। सेहो विशिष्ट लोक। दुलारपुरक चौधरी। हुनक सेवा-सत्कार मे कोनो भाङठ नहि होमक चाही। परन्तु समस्या ई जे पं० जी कैं कचहरीक काज सॅं ऎखन लहेरियासराय जैबाक छैन्ह। आब की हो? पंडिताइन कहलथिन्ह और और ओरिआओन त हमरा लोकनि सभटा कय देबैन्ह। एकटा भाँटा-अदौड़ी भऽ जैतैन्ह। चारपर सजमनि छैहै। भॅंटवर हैतैन्ह। तिलकोरक पात तरि देबैन्ह। तखन बड़ - बड़ी, पापड़, तिलौरी। परन्तु भारी बात त ई जे भोजनक हेतु बजाबय के जैतैन्ह? पं० जी किछु सोचि क बजलाह - जखन सभटा पीढ़ी पानि ठीक भऽ जाय तखन बचनू कें कहबैक । बजा अनतैन्ह । पाँच वर्षक अछि तैं की । बेस ढिठगर अछि ।ॱॱॱॱ की हौ बचनू ! पाहुनकें बजा अनबहुन से हैतौह कि ने ? कहिअहुन्ह- 'चलू, खाय लेल ।' तखन हम तोरा लेल बाजारसँ लट्टू नेने ऎबौह । ई कहि पं० जी बचनूकेँ दुलारसँ चुम्मा लेलथिन्ह और पनही पहिरि दलानपर ऎलाह। चौधरीजीके कहलथिन्ह - चौधरी जी, कहैत त संकोच होइत अछि। परन्तु एहन संयोग जे आइए एकटा मामिलाक तारीख छैक, से हमरा दस बजे कचहरी पहुँचब जरूरी अछि। अपने कैं एतय एसकर छोड़ि कऽ जाएब त महा अनर्गल लगैत अछि। परन्...

ग्रामसेविका \ चर्चरी \ ( हरिमोहन झा ) \ Liveankit

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मकुनाही पोखरिपर लूटन मिसर वैद्यकेँ मुँह धोइत देखि काशीनाथ कहलथिन्ह- वैद्यजी, एकटा नव गप्प सुनलिऎक अछि? वैद्यजी साकांक्ष होइत पुछलथिन्ह- की? कोन बात भेलैक अछि? काशीनाथ बजलाह- अपना इलाकामे एकटा ग्रामसेविका आएल अछि। वैद्यजी पुछलथिन्ह- 'ग्रामसेविका' कऽ की अर्थ? कि ओ सम्पूर्ण गामक पैर दबाओति? काशीनाथ- ओ घर-घर घूमिकऽ स्त्रीगणकेँ शिक्षा देति। वैद्यजी -की शिक्षा देति? काशीनाथ-यैह जे पर्दा तोड़िकऽ सभ काज करै जाइ। वैद्यजी दातमनिक जिभिया फेकैत बजलाह- आब जे-जे ने हो! फूदन चौधरी घाटपर बैसल लोटा मॅंजैत रहथि। ई गप्प सुनि बजलाह- ओकर वयस की हैतैक? काशीनाथ ठिकियबैत कहलथिन्ह- यैह करीब अट्ठारह उन्नैस। चौ०-विवाहिता अछि कि कुमारि? का०- देखबामे त कुमारिए जकाँ लगैत अछि। चौ०- तखन ओ अनका की सिखौतैक? नतिनी सिखाबय बुढ दादीकेँ का०- चौधरीजी, से नहि कहिऔक। ओ बहुत पढलि छैक। तैं सरकार एहि काजपर ओकरा बहाल कैने छैक। चौधरीजी कुरुड़ करैत बजलाह- हौ, तों सरकारेकेँ की बुझैत छह? अनकर बहु-बेटीकेँ नचाकऽ देखबामे बड़ मन लगैत छैक। पतिव्रतासॅं ओकरा कोन काज ? तावत् कानपर जनौ चढौने पहुँचि गेलाह पंडितजी। बजलाह-एहि युगमे भ्रष्टक उ...

Azadi Ka Amrit Mahotsav : 116 साल में छह बार बदला राष्ट्रीय ध्वज, जानें आजादी से पहले के पांच भारतीय झंडों की कहानी ।

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  Azadi Ka Amrit Mahotsav :  15 अगस्त, 2022 को देश की आजादी को 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस अवसर पर बीते एक साल यानी 15 अगस्त, 2021 से ही पूरे हिंदुस्तान में आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के तहत हर घर तिरंगा अभियान चलाया जा रहा है। गांव-गांव, शहर-शहर लोगों से अपने घरों और प्रतिष्ठानों पर तिरंगा फहराने की अपील की गई है। लेकिन इस तिरंगे के पीछे की कहानी बहुत लंबी है। बीते 116 साल में छह बार देश का झंडा बदला गया है। हालांकि, ये बदलाव आजादी मिलने तक ही हुए। इसलिए, आजादी की वर्षगांठ पर देशवासियों के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि हमारे राष्ट्रीय ध्वज की इस यात्रा में क्या-क्या अहम पड़ाव रहे और कब-कब, क्या-क्या बदलाव हुए। भारतीय राष्ट्रीय ध्वज में आखिरी बदलाव 1947 में हुआ था, उस वक्त इसे तिरंगे का नाम भी दिया गया। आइए जानते हैं तिरंगे तक का सफर | 1906 में मिला पहला राष्ट्रीय ध्वज  भारत की आजादी की लड़ाई जैसे-जैसे तेज होती जा रही थी, क्रांतिकारी दल अपने-अपने स्तर पर स्वतंत्र राष्ट्र की अलग प...

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