नहाय खाय : छठि पूजाक पहिल पड़ाव. LiveAbhinash
बिहार, झारखंड आरू उत्तर प्रदेश केरऽ कीछ हिस्सा म बहुत उत्साह स मनाबै जाय वला पर्व छठ सूर्य देव आरू हुनकऽ पत्नी उषा, भोरक देवी केरऽ अनूठा स्तोत्र अछि। ई पावनि चारि दिनक होइत अछि, जाहि मे प्रत्येक दिन अलग-अलग संस्कार सँ चिन्हित होइत अछि आ पहिल दिन, जे नहाय खाय के नाम सँ जानल जाइत अछि, आकाशीय पिंडक एहि विस्तृत पूजाक मंच तैयार करैत अछि | नहाय खाय नहाय खाय, जकर अर्थ "स्नान क के खाउ" होइत अछि, छठ पूजाक उत्सवक पहिल दिन मनाओल जाइत अछि | भक्त, मुख्य रूप सं महिला, भोर सं पहिने जागि क नदी, पोखरि या अन्य जल निकाय मे संस्कारात्मक सफाई करैत अछि. ई संस्कार अगिला तीन दिन मे होबय बला पवित्र पूजा के तैयारी मे शरीर आ आत्मा दुनू के शुद्धि के प्रतीक अछि | आध्यात्मिक स्नान सूर्यक पहिल किरण जेना-जेना परिदृश्य केँ धीरे-धीरे रोशन करैत अछि, भक्त लोकनि शीतल, बहैत पानि मे डूबि जाइत छथि | ई संस्कार स्नान मात्र शारीरिक शुद्धि नहिं थिक; ई मन आ आत्मा के शुद्ध करय के प्रतीकात्मक क्रिया अछि | निश्चिंत परिवेश आ शुद्ध, बहैत जलक स्पर्श सँ उपासक...