दियाबाती यानी दिबाली मनेबाक मैथिली कंसेप्ट। Liveabhinash
दियाबाती यानी दिबाली मनेबाक मैथिली कंसेप्ट : राजन झा
हिन्दी सिनेमा, हिन्दी चैनल आ हिन्दी माध्यमक किताब पढ़ि बहुत रास मैथिली भाषी दियाबाती मनेबाक पाछू राम आ राबण बला कंसेप्ट लैत छै। यानी राबण पर रामक बिजय उपरान्त राम केँ अयोध्या घुरि एबाक कंसेप्ट। मुदा दिबाली मे मैथिल सभक रीति जेना यम दीप जराएब, हुक्का पाती खेलब (उक फेरब), दियाबाती केर भिनसर मे डगरा पीटब, अगिला दिन माल जाल केर चुमान करब राम बला कंसेप्ट सँ मेल नै खाइ छै। सच कही तऽ राम बला कंसेप्ट मूलतः बैष्णव कंसेप्ट छै। मिथिला शाक्त बहुल क्षेत्र रहबाक कारणसँ एतय ना दशमी यानी दुर्गपूजा मे राम छै ना दियाबाती मे राम छै।
मिथिला क्षेत्र मे दियाबाती शाक्त कंसेप्ट सँ मनाएल जाइ। मिथिला केर दियाबाती देवी कालीक जन्म लय नरकासुर नाओक राक्षस केर बध कय सौंसे जगत कल्याण करब पर छै।
नरकासुर राक्षस केर उत्पात सँ अपन परिजनक अकाल मृत्यु सँ बचाव लेल यम केर दीप जराएल जाइ छै पहिल दिन। आ दोसर दिन देवी काली द्वारा जन्म लय नरकासुर नाओक राक्षस केर बध केलाक खुशी पर सौंसे घर- दुआरि मे दीप जराएल जाइ छै आ देवी काली केर अराधना कयल जाइ छै। नरकासुर नाओक राक्षस केर बध भेलाक कारणसँ परिजन पर अकाल मृत्यु केर संकट हटि जेबाक कारण दियाबाती राति केँ सुखराति सेहो कहल जाइत छै। आ अकाल मृत्यु केर संकट हटि जेबाक खुशी मे भिनसर मे सोनठी सँ डगरा बजाएल जाइ छै जे आब डरबाक कोनो बेगरता नै। नरकासुर जे हमर सभक परिजन केँ मारैत रहय आ हमर सभक धन लय हमरा सभकें दरिद्र बना देने रहय आब ओ स्थिति खत्म होयत। आब माल जाल (ओ समय मे धनक एकटा रुप) केँ सजाउ आ स्वस्थ रहबाक लेल पखेब खुआउ।
मिथिला केर लोक बेबहार मे कोनो पाबनि वा यज्ञ जाजन मे देव आ पितर दुनू केँ स्थान देल जाइ छै। पितरपक्ष मे आएल पितर केँ आ कोनो पितर केँ नरकासुर राक्षसक कारणसँ भेल अकाल मृत्यु लेल उक फेर (उक्का पाती खेल) शांति प्रदान कएल जाइ छै आ हुक्का पाती केर आगि केर इजोत देखा पितर केँ स्वर्ग जेबाक दिसि विदा कयल जाइ छै।
#शुभ_यमदीप(जमदीया)
देवी काली सभक परिजन केँ अकाल मृत्यु सँ रक्षा करथि।
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