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गीताक मर्म / खट्टर ककाक तरंग / हरिमोहन झा / Liveankit

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  खट्टर कका भांग घोंटैत रहथि । हमरा हाथ में गीताक पुस्तक देखि बजलाह - आब तों गीताक पाठ करैत छह ? हम कहलिऎन्ह – हॅं ! खट्टर कका बजलाह – हौ बाबू, तखन आब तोरा सॅं फराके रहक चाही । हम चकित होइत कहलिऎन्ह - से किऎक, खट्टर कका ? खट्टर कका भांग रगरैत बजलाह – हौ, पहिने अर्जुन कैं बड़-जेठ क विचार रहैन्ह । बाप-पित्ती पर कोना हाथ छोड़ब ? परन्तु गीताक आसव पान कय तेहन बुत्त भऽ गेलाह जे वृद्ध पितामह क छाती कैं विदीर्ण कय देलन्हि । तैं हमरो डर होइत अछि । कदाचित कोनो आरि-धूर लऽ कऽ तोरा सॅं तकरार भऽ जाय । और तोंहू अर्जुन जकाँ ज्ञानी भऽ विचारह जे - नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः । “ककाजीक आत्मा कैं त शस्त्र काटिए ने सकैत छैन्ह, एक गडांँस कसि कऽ लगा दिऎन्ह ।" और ओम्हर तोहर काकी घेओना पसारथुन्ह त बुझाबय लगबहुन जे -  वासांसि जीर्णानि यथा विहाय  नवानि गृह्णाति नरोऽपराणि । तथा शरीराणि विहाय जीर्णा न्यन्यानि संयाति नवानि देही ॥ “ककाजीक चेला बदलि गेलैन्ह, नव देह भेटलैन्ह अछि, अहाँ खुशी मनाउ,सोहर गाउ, कनैत छी किऎक ?” `````` हौ, बाबू ! यदि गामक युवक दल कैं...

पंडितक गप्प / खट्टर कका क तरंग / हरिमोहन झा / Liveankit

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       ओहि दिन भुसकौलक बहिरु पंडित कैं खट्टर कका सॅं भिड़न्त भऽ गेलैन्ह । बात ई भेलैक जे पंडितजी छीतनबाबूक ओहि ठाम श्राद्धक नेओत पूरय आयल रहथि । भुटकुनबाबूक मृत्यु पर गप्प चलैत छल । पंडितजी ज्ञानक बात सभ कहऽ लगलथिन्ह – भावी पर ककरो वश नहिं चलैत छैक । हुनका त एखन मरबाक वयस नहि छलैन्ह । परन्तु नाऽकाले म्रियते कश्चित प्राप्तकाले न जीब्रति । जखन काल पूर भऽ जाउक तखन केओ नहिं बाँचि सकैत अछि। और , जा काल नहि पूर्ण होउक ता मरियो नहि सकैत अछि । तावत् ठाकुरबाड़ीक पुजेगरी चरणामृत बाँटय एलाह । पंडितजी माथ पर छिटैत श्लोक पढय लगलाह - अकालमृत्युहरणं सर्वव्याधिविनाशनम । विष्णुपादोदकं पीत्वा शिरसा धारयाम्यहम ॥ एतबहि में कोम्हरो से पहुँचि गेलाह खट्टर कका । ओ अबितहि टोकलथिन्ह - की औ पंडितजी ! अहाँ एखने कहने छलिऎक जे विना काल पूर्ण भेने केओ मरिए नहिं सकैत अछि । तखन फेर 'अकालमृत्युहरणम' किऎक कहैत छिऎक। पंडितजी एकाएक तेना उलंग पकड़ा गेलाह जे कोनो जवाबे नहिं फुरलैन्हि । गोङियाय लगलाह । खट्टर कका हमरा कहलैन्ह – देखै छह ? जखन पंडित लोकनि खंडित भऽ जाइ छथि त ए...

सहरसाक गामसँ सिनेमाक रजतपटलधरि पहुँचलीह मिथिलाक बेटी संचिता यादव

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गामक संचिता यादवसँ फिल्मजगतक संचिता बसुधरिपछिला शुक्र दिन साउथ फिल्म इण्डस्ट्रीजक एकटा बहुप्रतीक्षित तेलुगू सिनेमा “फर्स्ट डे फर्स्ट शो” रिलीज भेल अछि आ से भारत संगहि अमेरिकाधरि धूम मचा रहल अछि। हर्षक खबरि ई जे एहि फिल्मसँ नायिकाक रूपमे डेब्यू कयलनि अछि मैथिल ललना- संचिता बसु। टिकटॉक, मौज, फेसबुक आदिपर देल अपन विडिओसँ सोशल मिडियापर सनसनी बनि उभरल संचिता मिथिलाक सहरसा जिलाक सलखुआ प्रखण्डन्तर्गत सितुआहा पंचायतक महादेव मंठ गामक रहनिहारि छथि । पिता सुरेन्द्र यादव आ माय वीणा यादवक उत्साहवर्द्धन सँ आइ संचिता बसु फिल्म जगतक एकटा मुकामधरि पहुँचबा मे सफल भ’ गेल छथि। २४ मार्च २००३ केँ सुरेन्द्र यादव आ वीणा यादवक बेटीक रूपमे जनमल संचिता नेनपनेसँ प्रतिभाशालिनी रहल छथि आ भागलपुरसँ इण्टरमीडिएट करैत सोशल मिडियापर अपन अदाकारीसँ एकटा विशाल प्रशंसकवर्ग तैयार कयलन्हि अछि। सोशल मिडियाक विभिन्न प्लेटफार्मपर मिलियनो संचिताक फैन-फालोवर छन्हि। सहरसाक रहयवला कास्टिंग निर्देशक नवनीत झाक नजरि संचिताक प्रतिभापर गेलन्हि आ नवनीतक सहयोगसँ संचिताक प्रवेश दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योगमे भेलन्हि आ सम्प्रति कैकटा सिनेमामे ...

चन्द्र-ग्रहण / खट्टर ककाक तरंग / हरिमोहन झा

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ओहि राति चन्द्र-ग्रहण लागल रहैक । सौंसे गामक लोक उमड़ि कऽ बड़का पोखरि में स्नान करैत छल । ओम्हर खट्टर कका अपना दलान में बैसल घूर तपैत रहथि । हम जा कऽ कहलिऎन्ह- खट्टर कका, ग्रहण स्नान नहिं करबैक । खट्टर कका बजलाह – हौ, ई पूस मास ! पाला पड़ैत ! ताहि में आधा रातिकऽ हम नहाउ गऽ ? से कि हमरा कुकुर कटने अछि ? हम कहलिऎन्ह - देखिऔक त स्नानक हेतु केहन भेड़ियाधसान मचल छैक? खट्टर कका सिहरैत बजलाह - हे नारायण ! ई सन सन बसात ! ई कनकन पानि ! कनेक छूबी त आङुर बर्फ बनि जाय ! ताहि में ई सहस्रो नर-नारी भरि छाती पानि में ठाढ छथि ! कतेको बुद्धिमान एकटंगा देने छथि । बच्चा सभ ठिठुरि रहल अछि । मर्द सभ सर्द भऽ रहल छथि । कोमलांगी सभ कठुआ रहल छथि । पुरबैया क लहरा तीतल नुआ कैं चीरि कय युवती क छाती छेदि रहल छैन्ह । वृद्धागण थरथर काँपि रहल छथि तथापि पुण्यक लोभें सभ केओ ठेल मठेला करैत आगाँ बढल जा रहल छथि । हाय रे धर्म प्राण देश ! हम पुछलिऎन्ह - खट्टर कका, अहाँ नहिंए नहैबैक ? खट्टर कका बजलाह – हौ, चन्द्रमा पर पृथ्वीक छाया पड़ल छैन्ह । किछुकाल मे, अपने हटि जैतैन्ह । ताहि खातिर हम किऎक पानि में डूबू ? सौंसे गामक संग हमहूँ ब...

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