मैथिली अधिकार दिवसक हार्दिक बधाई क' संग शुभकामना | Liveabhinash
समस्त मैथिली भाषी के मैथिली अधिकार(विजय) दिवस के हार्दिक बधाई क'संग शुभकामना ।आजुये के दिन 22 दिसम्बर 2003 में भारतीय संसद द्वारा अप्पन मायक भाषा मैथिलीक संवैधानिक मान्यता प्राप्त भेल छल,मुदा हमरा आँहा के मैथिली के प्रति उदासीनता के कारण मैथिली भाषा नञि पठन-पाठन , नञि राजकाज आ नञि रोजगारपरक भाषा बनल । ज' हम आँहा अपन मातृभाषा के बचावऽ के लेल आगु नञि आयब त' ओ दिन दुर नञि जे मैथिली, मैथिल आ मिथिला मात्र इतिहास बइन क' रहि जैऽ । ताहि पर सऽ मगधीया शासन मैथिली के मिटाबऽ लेल दिन पर दिन कुचक्र रचैत रहैत अछि, एखन बिहार लोक सेवा आयोग में सऽ हटेबाक धुरफंदा में लागल अछि, मैथिली के अपभ्रंश बोली बज्जिका आ अंगिका कऽ के स्वतंत्र अकादमी बना मैथिली के छिन भिन्न कऽ रहल अछि।जागु हे मैथिल समाज।
( Credit : Balram Mishra)
कोनो भी महत्वपूर्ण ‘दिवस’ वर्ष में एकैह बेर होएत छैक आ मनाओल सेहो जाएत छैक । विश्वभरि ऐहा मान्यता आ परम्परा छए । मुदा #मिथिला में एकैहटा ‘दिवस’ फरक–फरक तिथि में मनाउल जेबाक बात देखबा में आएल अछि । हमर खोजी ऐही बातक पुष्टि करति अछि । जतबे अगुवा आ संस्था, ओतबे ‘दिवस’ । वाह मिथिला आ वाह मिथिला कें कथित अभियानी ।
ऐही में दुटा समाचार ‘भारतीय संविधानक ८ म् अनुसूची मे मैथिली भाषा केँ शामिल करबाक घोषणा भारतीय राज–पत्र(गजेट) मे प्रकाशित कैल गेल बात सँ सम्बिन्धित अछि । दैनिक जागरण कें समाचार में मैथिली दिवसक सन्दर्भ उल्लेख नए छैक । आब बुझहू, पाजा ओइ पार जनवरी ८ आ डिसेम्बर २२ केँ ‘मैथिली दिवस’ ? पाजा ऐही पार जानकी नवमी कें ‘मैथिली दिवस’ ? नेपाल मे ऐकरे स्थापित करबाक कसम किछु गोटे खेने छइथ, त्याँ ऐही दिवस के ‘हंकार पत्र’ सोसल मिडिया में अन्धुने शेयर माडि रहल छइथ, लाइक पाबि रहल छइथ । ई पड पैघ दुर्भाग्य रहलइये मिथिला के, बिना बुझ्ने लोक सभ भेडिया धसान बनि जाएत छइथ ।
हमर प्रश्न, ‘मैथिली दिवस’ किएक आ कहिया ?’ आ ‘किनका केल ?’ । पहिले ई फरिछाऊ तहने कोनो दिवसक गप्प करी त उचित भँ सकैए आ होइत । जानकी मिथिला केँ मात्र नए रहि गेली , ओ विश्वव्यापी भँ गेली अछि । हिन्दू केँ आस्था केँ केन्द्र बिन्दू से त छन्हिए । जानकी केँ ‘मैथिली दिवस’ केँ घेरा में नए बान्हल जाए, से हमर
अनुरोध । जौ ई पराक्रम कियो करत या करि रहल छइथ, संकिर्ण मानसिकता के उपज मात्र ई भँ सकैत अए । ऐही सँ मिथिला आ मैथिली के कल्याण नए होइत । मिथिला केँ पहिचान आमजन कें विमर्श से होमाँक चाहीँ । (Source: madheshinepali )

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